हैदराबाद की आराधना ; एक 13 साल की लड़की का 68 दिनों का उपवास

अन्धविश्वास की कहानिया जबतक केवल किताबो और टीवी शो में हो तब तक ही अच्छी लगती है लेकिन जब यह हमें हमारे असल जिंदगी में दिखती है तो इसका काला सच समझ में आता है जिसके चलते कई लोग अपनों से दूर हो जाते है तो कई लोग अपने किसी खास को खो देते है मैंने कई बार पढ़ा और सुना है की दुनिया में कई ऐसे परिवार है जिन्होंने जिन, बाबाओं तथा तांत्रिक के चककर में आके अपने बचो को खो दिया लेकिन फिर भी उनका इन ढकोसले तांत्रिको पर से विश्वास नहीं गया.

 

जैसे एक बच्चा यदि उसे साप काट ले तो ये लोग उन्हें डॉक्टर को दिखने के बजाए तांत्रिक को इस उम्मीद पर दिखाते है की वह झाड़फुक करके उनके बच्चे के शरीर से वह जहर निकाल देगा लेकिन असल में वो अपने बच्चे को अपने ही हाथो जहर दे रहे होते है और अंत में वो अपना ही बच्चा खो देते है आप ही बताइये इनसब का जिम्मेदार कौन है, वो तांत्रिक या वो परिवार जिन्होंने अपने ही बच्चे को मौत के हवाले कर दिया खैर ये तो बस एक बात थी लेकिन असल में भी यदि आज के ज़माने में इस प्रकार की घटना हो तो अजीब लगता है और गुस्सा भी आता है की हमारा यह समाज जो की खुद को मॉर्डन बताता है वह असल में कितना पिछड़ा और अंधविश्वासी है जिसके चलते वह अपने ही औलाद खो देता है और मैं आज आप को एक ऐसे ही घटना के बारे में बताने जा रहा हूँ जिसमे एक परिवार ने अपने अंधश्रद्धा के कारन अपने ही बेटी को खो दिया.

हैदराबाद की आराधना ; एक १३ साल की लड़की का 68 दिनों का उपवास

हैदराबाद की रहने वाली एक 13 साल की एक मासूम लड़की आराधना की इसी अन्धविश्वास के चलते मौत हो गयी असल में मृतका के परिवार को बिजनेस में घाटे हो रहे थे जिसके चलते परिवार ने अपनी बेटी को उपवास पर इस उम्मीद के साथ बिठा दिया की यह व्रत उन्हें बिजनेस में हो रहे घाटे से उभारेगा. बिजनेस बचा की नहीं यह तो नहीं पता लेकिन इसके चलते एक मासूम लड़की ने अपने जान गवादी.

हैदराबाद की आराधना जो केवल 13 साल की और 7वी छात्र थी उस उपवास के चलते उसने अपना दम तोड़ दिया जानकारी के मुताबिक चेन्नई के एक बड़े संत ने आराधना के परिवार वालो को यह सुझव दिया की यदि उनकी बेटी 4 माह का उपवास करेगी तो उन्हें बिजनेस में धन की प्राप्ति होगी इसलिए उसने अपने परिवार के खातिर उस व्रत को पुरे मन के साथ पूरा किया जिसका फल उस मासूम बच्ची को अपनी जान गवा कर देनी पड़ी.

पुलिस की कारवाही के मुताबिक

असल में इस उपवास की कहानी के पीछे का सच बहुत ही घटिया और चौका देने वाला है पुलिस के मुताबिक, जैन समुदाय से ताल्लुक रखने वाला लछमीचन्द का अपने शहर में सोने का बिजनेस था जो की काफी वक़्त से घाटे में चल रहा था जिसके बाद ही इसके निवारण हेतु इस तरह के घटिया अन्धविश्वास का सहारा लिया गया जिसके बाद आराधना 68 दिनों तक भूखी रही और जब उसकी हालत ख़राब हुई तो फौरन उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया जहा डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया घटना की खबर जैसे ही शहर में फैली चाइल्ड राइट एसोसिएशन ने हैदराबाद पुलिस कमिश्नर महेंद्र रेड्डी से मामले की शिकायत की और घटना की गंभीरता को देखते हुए इस पर फौरन ही कारवाही का आदेश दिया गया और कई संस्थाओ ने मिलकर परिजनों के खिलाफ कारवाही की मांग की हाला की अभी भी कारवाही हो रही है पर इन सब में भी जो बात ऊपर है वह ये की एक मासूम की मौत हो गयी.

अगर मैं आप से पूछू की आराधना की मौत का जिम्मेदार कौन है तो आप क्या कहेगी वो तांत्रिक जिसने यह घटिया उपाय बताया या वो परिवार जिसने अपने ही हाथो अपने घर की बेटी को मौत की नींद दे दी, लोग कहते है की बेटियां घर की लक्ष्मी होती है तो आप ही बताइए की भला लक्ष्मी के भूखे रहने पर कैसे किसी को धन की प्राप्ति हो सकती है.

(इस कहानी से मेरा किसी के धर्म जाती को ठेस पहुँचाना नहीं बल्कि दुनिया में हो रही अन्धविश्वास के कारण मौतों को उजागर करना  तथा उनसे सीख लेना है, इस कहानी पर जाती धर्म के कमेंट न करे )

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